रमज़ान

रमज़ान

रमाज़ान का पवित्र महिना शुरु

पवित्र महीना

पवित्र महीना

मुस्लिम समुदाय  इस महीने को परम पवित्र मानते है। यह इस्लामी पंचाग का नौवाँ महीना होता है।

मुहम्मद  साहब

मुहम्मद  साहब

इस्लामी मान्यता के अनुसार इस माह में खुदा से मुहम्मद साहब को कुरान की आयतें मिली थी।

अशरा

अशरा

रमजान के तीन अशरा होते है जो रहमत बरकत और मगफिरत में बटे होते है।

रहमत

रहमत

रमजान के पहले 10 दिन रहमत के होते है जिसमे खुदा की इबादत, नमाज, और दान करते है।

बरकत

बरकत

रमजान का दूसरा अशरा बरकत का होता है यह भी 10 दिन का होता है। इसमे जाने अनजाने में की गलतियों की माफी मांगी जाती है।

मगफिरत

मगफिरत

रमजान का तीसरा अशरा मगफिरत का होता है इसमे उनके द्वारा किये गये पापों से मुक्ति मिले और मृत्यु के बाद उन्हें अल्लाह की पनाह मिले।

सहरी

सहरी

रमजान रखने वाला व्यक्ति सूर्य निकलने से पूर्व भोजन या फल का सेवन कर लेता है इसको सहरी कहते है।

सुर्य निकलने के बाद

सुर्य निकलने के बाद

सूर्य निकलने के बाद चाहे जितनी गर्म पड़े या भूख लगे आप किसी भी वस्तु का सेवन नही कर सकते है। इस तरह खुदा अपने बंदो की परीक्षा लेता है।

इफ्तार

इफ्तार

शाम के समय नमाज पढ़ा जाता है उसके बाद इफ्तार किया जाता है।

इशा  व तरावीह

रात में इशा की नमाज (करीब 9 बजे) के बाद तरावीह की नमाज अदा की जाती है।

ईद

ईद

महीने के अंत 29 का चाँद होने पर ईद मनायी जाती है।

फितरा

फितरा

ईद के दिन से ही फितरा (एक तरह का दान) हर मुस्लिम को अदा करना होता है।