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What is the use of Speaker

Speaker-

आप अपने चारो तरफ विभिन्न प्रकार के ध्वनि को किसी न किसी माध्यम से जरुर सुने होगें। यह ध्वनि मीठी हो सकती या करकस हो सकती है जो निर्भर करता है speaker की गुणवत्ता पर । आज के समय में स्पीकर की गुणवत्ता को इतना बढ़ा दिया गया है कि यदि उसको चला दिया जाता है तो व्यक्ति न चाहते हुए भी वह जिसके लिए बजाया गया है वह काम करने लगता है जैसे यदि डान्स के लिए बजाया गया है तो डान्स करने लगते है अथवा सोने के लिए बजाया गया है तो लोग सोने लगते है अथवा झुमने के लिए बजाया गया है तो लोग झुमने लगते है इन्ही सब गुणवत्ता को देखते हुए कम्प्युटर के इस टॉपिक में हम स्पीकर के बारे में विस्तार से जानेगें।

स्पीकर क्या होता है what is the speaker –

यह एक आउटपुट इलेक्ट्रानिक डिवाइस है इसका इस्तेमाल किसी वायस को जरुरत के हिसाब से सुनने के लिए प्रयोग किया जाता है।

जब कोई व्यक्ति किसी वायस को किसी माध्यम से जैसे मोबाइल,लैपटाप,डेस्कटॉप या अन्य माध्यम से रिकार्ड करता है तो उसको सुनने के लिए जिसकी आवश्यकता पड़ती है उसे स्पीकर कहते है।

यह एक कम्प्युटर का हार्डवेयर पार्ट होता है जिसको हम कम्प्युटर के क्षेत्र में आउटपुट डिवाइस के नाम से जानते है। जिसका काम होता है आडियो आउटपुट उत्पन्न करना। जिसको सुना जा सके।

स्पीकर का इतिहास History of Speaker-

आज के समय में हम स्पीकर के माध्यम से किसी के आवाज को आप कही भी सुन सकते है क्या आप जानते है इस स्पीकर के बारे में की किसने इसका आविष्कार किया था। आइये जानते है स्पीकर का आविष्कार किसने किया था।

Alexander Graham Bell द्वारा पहले इलेक्ट्रानिक लाउटस्पीकर को जो टेलीफोन का पार्ट था को 1876 में पेटेंट कराया गया था।

1924 में पहला कामर्शियल इलेक्ट्रानिक लाउटस्पीकर को प्रस्तुत किया गया था। मूल ध्वनी को पुनः उत्पन्न करने के लिए यह एक विद्युत चुम्बक का प्रयोग करता था जो पेपर शुंक का उपयोग करता था।

सन 1924 के आसपास Walter H.Schottky और Dr Erwin Gerlach ने रीबन लाउडस्पीकर का आविश्कार किया था जो डायोड का उपयोग करता था।

1943 में Altec Lansing 604 को प्रस्तुत किया गया था जो डुपलेक्स ड्राइवर का उपयोग करता था जो साउन्ड के गुणवत्ता और परफॉर्मेन्स दोनो को बढा दिया था।

स्कीपकर काम कैसे करता है  how speaker work–

जैसा कि सबको बता है कि स्पीकर इलेक्ट्रानिक सिग्नल को ध्वनि सिग्नल में बदलता है।

इसको ध्वनि सिग्नल में बदलने के लिए विभिन्न स्टेप को फालो करना पड़ता है क्योकि स्पीकर में एक मैग्नेट और एक इलेक्ट्रोमैग्नेट होता है। जिसमे इलेक्ट्रानिक सिग्नल प्राप्त होने पर हलचल शुरु होता है। जिससे कंपन उत्पन्न होता है । यह कंपन Diaphragm द्वारा ध्वनि में बदल जाता है।

यह साउन्ड या तो एनलॉग होता है या डिजिटल जब कम्प्युटर या किसी अन्य डिवाइस द्वारा साउन्ड को सिग्नल एनलॉग के रुप में प्राप्त होता है तो एनलॉग स्पीकर उसे ध्वनि में बदल देता है। लेकिन जब साउन्ड को यह सिग्नल डिजिटल रुप में प्राप्त होता है तो साउन्ड पहले इसे एनलॉग में बदलता है फिर उसे ध्वनि में बदल देता है।

स्पीकर के प्रकार  Type of speaker–

स्पीकर को उसके क्रियाविधि,साइज,डिजाइन और कीमत के आधार पर कई भागो में बाटा गया है।

आइये जानते है कुछ स्पीकर के बारे में

  • Outdoor Speakers
  • Bluetooth Speakers
  • On Wall Speakers
  • Sub- Woofers Speakers
  • Loudspeakers
  • Floor standing Speakers
  • Central Channel Speakers
  • Satellite Speakers

स्पीकर से लाभ Benfit of speaker –

स्पीकर का उपयोग कर हम अधिक संख्या में लोगो को संबोधन कर सकते है।

आज के समय में जो स्पीकर आ रहे है उनसे हम वायस को अपने अनुसार मधुर कर सकते है।

स्पीकर का प्रयोग कर आवाज को दूर तक पहुँचा सकते है।

स्पीकर के वालूम को बढ़ा कर कंपन उत्पन्न कर सकते है।

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